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जब वाजपेयी ख़ुद ' राजधर्म 'का पालन नहीं कर सके ?पुण्यतिथि पर याद किए गए पूर्व प्रधानमंत्री
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विशेष रिपोर्ट

जब वाजपेयी ख़ुद ' राजधर्म 'का पालन नहीं कर सके ?पुण्यतिथि पर याद किए गए पूर्व प्रधानमंत्री

Manthan Today
•16 अगस्त 2026 को 03:14 am बजे•21 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

आठवीं पुण्यतिथि पर पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को देश नमन कर रहा है.राजधर्म के प्रति वह समर्पित ज़रूर थे लेकिन एक मौक़े पर वह इस जवाबदेही को नहीं निभा पाए?


सेराज अनवर/पटना

आठवीं पुण्यतिथि पर पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को देश नमन कर रहा है. दिल्ली में अटलजी के समाधि स्थल सदैव अटल पर पहुंच कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी ने श्रद्धांजलि दी. अटल बिहारी बाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ था।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके विचारों और राष्ट्र के लिए किए गए प्रयासों ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपनी वाकपटुता के लिए हमेशा याद किए जाते हैं. उनके शब्द विरोधियों के साथ-साथ दोस्तों को भी सीख दे देते थे. देशवासियों के प्रति उनके विचार, व्यवहार को देखते हुए लोग वाजपेयी को सांप्रदायिक पार्टी के सेकुलर नेता भी कह देते थे. हिंदू - मुस्लिम के प्रति उनका लगाव एक जैसा था.विश्व हिंदू परिषद ने राममंदिर के मामले पर राम शिला पूजन कार्यक्रम कर वाजपेयी की मर्जी के खिलाफ आंदोलन खड़ा कर दिया था, जिससे वाजपेयी जी संघ से नाराज़ हो गए थे. राजधर्म के प्रति वह समर्पित ज़रूर थे लेकिन एक मौक़े पर वह इस जवाबदेही को नहीं निभा पाए?
साल 2002 में गुजरात दंगों के बाद देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उस समय के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राजधर्म निभाने की सलाह दी थी.वाजपेयी का ये बयान काफी चर्चा में रहा था. इसके कई मायने निकाले गए थे. वाजपेयी के इस बयान के बाद माना गया था कि बतौर गुजरात सीएम नरेंद्र मोदी के दिन गिने-चुने ही रह गए हैं. लेकिन नरेंद्र मोदी की कुर्सी बरक़रार रही.माना जाता है कि वाजपेयी गुजरात दंगा से नाराज़ थे.एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाजपेयी ने कहा कि नरेंद्र मोदी को राजधर्म का पालन करना चाहिए। इस प्रेस वार्ता में मोदी भी मौजूद थे.

आज भी जब 2002 के गुजरात दंगों की चर्चा होती है तो अटल बिहारी वाजपेयी के राजधर्म की यादें ताज़ा हो जाती हैं और इस बात की भी चर्चा होती है कि क्या मजबूरी थी? ख़ुद अटल बिहारी वाजपेयी ने राजधर्म नहीं निभाया? वह प्रधानमंत्री थे, मोदी मुख्यमंत्री थे. वाजपेयी को लग रहा था कि राज्य का मुख्यमंत्री राजधर्म निभाने में असमर्थ है तो उन्हें अपदस्थ भी कर सकते थे? क्या यह सवाल नहीं उठता है , अटल बिहारी वाजपेयी ने ख़ुद राजधर्म का पालन नहीं किया? राजधर्म सलाह से नहीं चलता, कभी इसके पालन में कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं. गुजरात जल रहा था, वाजपेयी अंदर से विचलित थे. तभी राज्य के मुख्यमंत्री को राजधर्म निभाने की सलाह दी थी.लेकिन इस जवाबदेही से ख़ुद राह ए फरार अख़्तियार कर गए थे.

यह वाकया तब का है जब गुजरात में हुई हिंसा के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्य का दौरा किया था. उस समय गुजरात में भी भाजपा की सरकार थी और नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे. गुजरात में अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे तब एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि क्या आप मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कोई संदेश लेकर आए हैं.इस सवाल का जवाब वाजपेयी ने अपनी चिरपरिचित शैली में दिया. उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री के लिए मेरा सिर्फ एक संदेश है कि वह राजधर्म का पालन करे… राजा के लिए, शासक के लिए प्रजा-प्रजा में भेद नहीं हो सकता. न जन्म के आधार पर, न जाति के आधार पर,न संप्रदाय के आधार पर.’

वाजपेयी आज नहीं हैं.लेकिन राजधर्म पर जो बहस छेड़ गए .क्या वह आज तक पालन हो सका? क्या पालन हो रहा है? क्या कभी पालन होगा?यह सवाल हर उस वक़्त उठेगा जब प्रजा व्याकुल होगी. ख़ास कर एक तबक़ा को टार्गेट किया जाएगा?
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