गया के अब्दुल्लाह गज़ाली ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र लॉकडाउन में पुलिस दमन पर लगायें रोक,मानवाधिकार की करें हिफ़ाज़त

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पटना(शाद हुसैन)कोरोना वायरस के ख़तरे के मद्देनज़र लॉकडाउन के दौरान आम अवाम,मज़दूरों पर पुलिस दमन को लेकर कलकत्ता विश्वविद्यालय में विधि के छात्र ( BALLB पंचम वर्ष )गया,बिहार निवासी अब्दुल्ला ग़ज़ाली ने भारत के मुख्य न्यायाधीश अरविंद बोबडे को खुला पत्र लिखा है,जिसमें उन्होंने कहा है कि कैसे मानवाधिकार का हनन हो रहा है .पत्र में कहा गया है कि पूरे भारत में लॉकडाउन के बीच पुलिस दमन कि खबरें सुनने को मिल रही है,हर तरफ़ पुलिस कि बर्बरता सुनने और देखने को मिल रहा है.

गृह मंत्रालय ने लॉकडॉउन के संदर्भ में 24 मार्च को ही दिशा निर्देश जारी कर दिए थे, जिसमें कहा गया है कि अनिवार्य वस्तुओं कि दुकान और प्रतिष्ठान खुली रहेंगी,जैसी की राशन दुकान , गैस एजेंसी, दवा दुकान, दूध , एटीएम ,बैंक ,इत्यादि.परंतु ऐसे में कोई व्यक्ति अगर बाहर निकल रहा है उसे पुलिस का दमन झेलना पड़ रहा है.

पुलिस विभिन्न प्रकार से लोगों को परेशान कर रही है,किसी को मुर्गा बनाया जा रहा है तो किसी को रेंग कर चलना सिखाया जा रहा है .अगर देश भर से आने वाले वीडियो को माना जाए तो यह बड़े स्तर पर मानव अधिकार का उलंघन होता हुआ दिख रहा है.पुलिस का रवैया गैर इंसानी है और बर्बरता पूर्ण है.

कोलकाता में एक 32 वर्षीय व्यक्ति कि मौत तब हो गई जब उनको पुलिस ने बेरहमी से मारा,उनका गुनाह सिर्फ़ इतना था के वह दूध लाने घर से बाहर जा रहे थे

ग़ज़ाली ने अपने पत्र में इस बात का भी वर्णन किया है कि लॉकडाउन में हजारों मज़दूर दिल्ली और दूसरे शहरों में फंसे हुए हैं, यातायात व्यवस्था न होने की वजह से उन्होंने पैदल ही चलना शुरू कर दिया है,इनमें से कुछ लोगों का घर 1200 किलोमीटर से भी ज़्यादा दूर है.उनके पास न खाना है,न पानी और न ही ठहरने के लिए कोई छत.उनकी इस कठिनाई को पुलिस ने और दुर्लभ बना दिया है,उनको हर थोड़ी देर पर पुलिस बल का प्रकोप झेलना पड़ता है.

हमारी माननीय मुख्य न्यायधीश से यह विनती है कि पुलिस दमन पर रोक लगाने के लिए राज्यों को आगाह किया जाए.इन मजदूरों को जो सड़कों पर फंसे हुए हैं उनको वहां से निकलने के लिए उच्च न्यायालय सरकार को आदेश दे कि वह उनको वहां से सकुशल घर पहुंचाने का इंतजाम करे .

1 COMMENT

  1. Mr. Abdullah Ghazali, you have taken a splendid step to help voiceless Indians, who are suffering under the wrath of organized thrashing. The COVID-19 was unfortunate and unforseen, but it’s the duty of every government to provide necessities to every citizen at ease. The inhumane beating of policemen leaves a dark impression on the rights of human all across the nation. I salute your daring attitude and a beautiful articulation of thoughts into words. Keep up such good work. Best wishes. God bless.

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