मामला कुर्जी मस्जिद पटना में विदेशी नागरिकों को छिपाने का: आतंकी नहीं अल्लाह के बंदे हैं तबलीगी जमात के लोग, जांच-पड़ताल के बाद पुलिस ने रूसी नागरिकों को छोड़ा

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* मेडिकल टेस्ट में कोई भी कोरोनाग्रस्त नहीं

* इटली-ईरान नहीं,किर्गिस्तान की है जमात

* समनपुरा बेलाल मस्जिद में ठहराया गया

सेराज अनवर

पटना:दाढ़ी-टोपी वाले मुसलमानों को लेकर लोगों में बड़ी ग़लतफहमी है ,यदि वो विदेशी हो तो आतंकी ही होगा.ऐसी धरणा बन गयी है.सोमवार को इसी सवाल पर पटना के कुर्जी मस्जिद में बवाल हो गया.संदेह के आधार पर पुलिस बुला ली गयी. स्थानीय लोग मस्जिद बन्द करने की मांग करने लगे.चैनलों ने ग़लत खबर चला कर इस मामला को और भड़का दिया.निजी चैनलों ने जांच-पड़ताल के लिए हिरासत में लिए गये तबलीगी जमात के लोगों को आतंकी के रुप में पेश किया.जिससे मामला काफी गरमा गया.मस्जिद में इटली और ईरान के लोगों के छिपे रहने की बात कही गयी.जबकि यह सीधे मुसलमान अल्लाह के बंदे हैं,न कि आतंकी.रहने वाले भी रुस के किर्गिस्तान के हैं.इनका जुड़ाव तबलीगी जमात से है.

यह जमात मुसलमानों को सच्चा इंसान बनाने का काम करते हैं.इतने सीधे होते हैं कि नमाज़-रोज़ा के अलावा दुनिया से कोई मतलब नहीं होता.इस वजह कर मुसलमानों का एक तबक़ा इनसे नाराज़ रहता है कि जमात का जितना बड़ा दायरा है,भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में दख़ल होना चाहिए.इस जमात के आलमी इज्तेमा में बीस से पचीस लाख लोग जुटते हैं.मगर इज्तेमा में सियासी नेताओं को मंच पर चढ़ने की इजाज़त नहीं होती है.1993 में गया में आयोजित इज्तेमा में बिहार के तत्कालीन राज्यपाल ए आर क़िदवाई को दुआ में मंच पर शामिल नहीं होने दिया गया था,जिससे क़िदवाई बहुत नाराज़ हुए थे.पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के भरसक प्रयास के बावजूद हज़रत जी(अमीर तबलीगी जमात)से मुलाक़ात नहीं हो पायी थी.आज जिन विदेशी नागरिकों को लेकर हंगामा हुआ,वह इसी तबलीगी जमात से जुड़े हैं.

जमात पूरी दुनिया में घुमती रहती है.जमात के नियमों के मुताबिक़ चार महीना,चालीस दिन और तीन दिनों के लिए अलग -अलग दस्ता बना कर शहर-शहर तबलीग का काम किया जाता है.इसे चिल्ला कहते हें.तबलीग का काम मुसलमानों के बीच में ही चलता है.उन्हें सही तौर से नमाज़ अदा करने का तरीक़ा बताया जाता है.किर्गिस्तान की जमात भी इसी मक़सद से भारत आयी हुई है.पटना में तबलीग के एक ज़िम्मेदार मोहम्मद ताहिर ने बताया कि जमात भारत में तब आयी जब कोरोना का कोई मामला नहीं था.दस सदस्यीय यह जमात चालीस दिनों के चिल्ला पर है.पिछले महीने 20 फ़रवरी के क़रीब दिल्ली के नेजाम उद्दिन में डेरा डाला.नेजाम उद्दिन भारत में तबलीग का मरकज़ है.मरकज़ से तय होता है कि फलां जमात कहां जायेगी.इसकी सूचना ज़िला प्रशासन और खुफ़िया तंत्र को भी रहता है.नेजाम उद्दिन से यह जमात एक महीना पूर्व सीधे पटना आयी.पटना में तबलीग का मरकज़ भिखना पहाड़ी स्थित नूरी मस्जिद में है.जमात यहीं से रह कर पटना में तबलीग का काम रही थी.

आज सुबह ही कुर्जी मस्जिद पहुंची थी कि ज़बर्दस्त बखेड़ा खड़ा कर दिया गया.पुलिस आयी और सभी को अपने साथ ले गयी.पटना एम्स में उनका जांच कराया गया,मेडिकल टेस्ट में जुकाम,बुखार कुछ भी नहीं पाया गया.पुलिस ने उन्हें बाइज़्ज़त छोड़ दिया.अभी जमात समनपुरा स्थित बेलाल मस्जिद में ठहरी है.पांच अप्रैल तक यहीं रहेगी.मस्जिद के ऊपरी तल्ला में इन्हें ठहराया गया है.इनकी गलती यह है कि मुश्किल हालात में भी अल्लाह का पैग़ाम लोगों तक पहुंचा रहे हैं.जबकि कोरोना वायरस को देखते हुए नेजामउद्दिन से भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.मस्जिद से बाहर कम निकलने को कहा गया है.बिहार में इमारत ए शरिया की तरफ़ से भी घरों में या कम संख्या में मस्जिद में नमाज़ पढ़ने को कहा जा रहा है.ताहिर कहते हैं कि इनके पास पासपोर्ट है,आईबी ,गृहमंत्रालय की नज़र में हैं, ग़लत तरीक़े से इन्हें छिपा कर नहीं रखा गया है.अचानक लॉक डाउन से यह मसला खड़ा हो गया.

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