इमारत ए शरिया ने उर्दू के विकास का उठाया बीड़ा;इदारा मना रहा ‘तालीम व तहफ़्फ़ुज़ ए उर्दू ‘सप्ताह

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सेराज अनवर

पटना:उर्दू हमारी साझी संस्कृति की समृद्ध विरासत है. देश की आज़ादी में भी इस भाषा का बड़ा योगदान है. भारत की गंगा-जामुनी संस्कृति एवं इसके विचारों को पूरी दुनिया के सामने लाने में इस भाषा का योगदान अविस्मरणीय है इसलिए लोगों का दायित्व है कि इस भाषा को सहेज कर रखने और इसके समग्र विकास के लिए प्रयासरत रहें .अपने घरों में उर्दू बोलने , पढ़ने और लिखने का माहौल बनाएं.उर्दू की किताबें , उर्दू अखबार,उर्दू न्यूज़ पोर्टल पढ़ने का मामूल बनायें.बिहार-झारखंड-उड़ीसा की सबसे बड़ी धार्मिक-सामाजिक संस्था इमारत ए शरिया ने अमीर ए शरीयत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी की निगरानी में उर्दू के विकास और इसके तहफ़्फ़ुज़ का बीड़ा उठाया है.इमारत ने सोमवार 1 फरवरी से बुनियादी दीनी तालीम को आम करने,आधुनिक शिक्षण संस्थानों की स्थापना तथा उर्दू भाषा के विकास के लिए राज्यव्यापी अभियान का आग़ाज़ किया है.’हफ़्ता बराये तालीम व तहफ़्फ़ुज़ ए उर्दू’के नाम से यह मुहिम 14 फरवरी तक चलेगी.इस अभियान के तहत बिहार के सभी 38 जिले के प्रत्येक शहर ,गांव में उर्दू की पंचायतें लगायी जा रही हैं,सभायें हो रही हैं.इन सभाओं में भारी संख्या में लोग जुट रहे हैं और उर्दू के साथ दीनी,आधुनिक शिक्षा के प्रति जागृत हो रहे हैं.ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव और इमारत ए शरिया के अमीर मौलाना वली रहमानी के निर्देश पर ‘उर्दू सप्ताह’को सफल बनाने के लिए इमारत के ज़िम्मेदार पूरे बिहार में फैल गये हैं.

इमारत ए शरिया में नाज़िम मौलाना शिब्ली क़ासमी मीडिया को संबोधित करते

कलपूर्णिया,भागलपुर,खगड़िया,समस्तीपुर,भोजपुर,बक्सर,आरा,नालंदा में सफल आयोजन के बाद आज कटिहार,बांका,बेगूसराय,दरभंगा,पूर्वी चंपारण में सभायें आयोजित की जा रही हैं.इमारत ए शरिया के कार्यवाहक सचिव(नाज़िम)मौलाना मोहम्मद शिब्ली क़ासमी ने आवाज़ द वॉयस को बताया कि अपने असूलों,नज़रिया की मज़बूती के लिए हर गांव -बस्ती में बुनियादी दीनी तालीम के मकतब स्थापित करना ज़रूरी है.शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की जाये,स्कूल-कॉलेज तथा तकनीकी शिक्षण संस्थान खोले जायें,जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था हो.उनका यह भी कहना है कि समर्थ लोग अपने संसाधनों को सामाजिक विकास में लगायें.इसके अलावा उर्दू भाषा का समग्र विकास सुनिश्चित की जाये.मीडिया को उन्होंने बताया कि इस अभियान के लिए बिहार के सभी जिलों में कमेटी बनायी गयी है.14 फरवरी को अभियान का समापन पटना में इमारत ए शरिया के अलमहद भवन में होगा.इस मौक़े पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया है.इसमें मौलाना वली रहमानी भी मौजूद रहेंगे.समापन समारोह में उर्दू तहरीक से जुड़ी शख़्शितों का जमघट लगेगा.जिसमें उर्दू और तालीम को घर-घर तक पहुंचाने के लिए ठोस रणनीति बनेगी. मौलाना शिबली कहते हैं कि इमारत शरिया ने हमेशा ही समय और परिस्थितियों की मांग पर कड़ी नजर रखी है और उस के अनुसार कौम व मिल्लत का नेतृत्व किया है.इमारत के इस अभियान से पूरे प्रदेश में उर्दू और दीनी तालीम को लेकर जश्न का माहौल है.चार-पांच जिले में ’तालीम व तहफ़्फ़ुज़ उर्दू सप्ताह’का आयोजन चल रहा है.

3 फरवरी को किशनगंज,लखीसराय,गया,मधुबनी,कैमूर,शिवहर,4 फरवरी को अररिया,सहरसा,जमुई,औरंगाबाद,रोहतास,सीतामढ़ी,6 फरवरी को सुपौल,शेखपुरा,गोपालगंज,अरवल,वैशाली और 7 फरवरी को मधेपुरा,मुंगेर,सीवान,सारण,नवादा,जहानाबाद,पश्चिम चंपारण में सभायें आयोजित हैं.

3 फरवरी को किशनगंज,लखीसराय,गया,मधुबनी,कैमूर,शिवहर,4 फरवरी को अररिया,सहरसा,जमुई,औरंगाबाद,रोहतास,सीतामढ़ी,6 फरवरी को सुपौल,शेखपुरा,गोपालगंज,अरवल,वैशाली और 7 फरवरी को मधेपुरा,मुंगेर,सीवान,सारण,नवादा,जहानाबाद,पश्चिम चंपारण में सभायें आयोजित हैं.5 फरवरी शुक्रवार को कोई कार्यक्रम नहीं है.इस अभियान की रूपरेखा बताते हुए नाज़िम इमारत ए शरिया मौलाना शिब्ली ने कहा कि तालीमी इंक़लाब के लिए इमारत ए शरिया ने एक बहुआयामी रणनीति बनायी है.जिसमें बुनियादी दीनी मकतब की स्थापना के लिए एक फ्रेमवर्क दिया गया है.साथ ही माडर्न स्कूल और कोचिंग खोलने,व्यक्तिगत और संस्थागत आधार पर उर्दू के विकास के लिए कार्य करने की योजना शामिल है.इस मौक़े पर मुफ़्ती मोहम्मद सनाउल होदा क़ासमी,मौलाना सुहैल अहमद नदवी,सुहैल अहमद क़ासमी,मुफ़्ती सईद उर रहमान,मौलाना अरशद रहमानी,डॉ.निसार अहमद,मौलाना नसीर उद्दिन मज़ाहिरी भी मौजूद थे.

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