जदयू की मुसलमानों से नाराज़गी बरक़रार:41 ज़िलाध्यक्षों में मात्र 4 मुसलमान; पार्टी मुख्य पत्र उर्दू में नहीं

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सेराज अनवर

पटना:विधानसभा चुनाव में सभी 11 मुस्लिम प्रत्याशियों की करारी शिकस्त से नीतीश कुमार मुसलमानों से भारी नाराज़ हैं.जदयू की नाराज़गी अल्पसंख्यक समाज से ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही.सोमवार को नाराज़गी की झलक फिर स्पष्ट नज़र आयी.पार्टी ने अपना मासिक मुख्य पत्र निकालने का फैसला किया है.आज पत्रिका का विमोचन था.पार्टी की तरफ से पत्रिका निकलना शुरू हो गयी है.पार्टी मुख्यालय में विमोचन समारोह रखा गया.हिंदी और अंग्रेज़ी में पत्रिका प्रकाशित तो हुई मगर उर्दू में पत्रिका नहीं निकाली गयी है.उर्दू बिहार की दूसरी सरकारी भाषा है.उर्दू बोलने और पढ़ने वालों कि राज्य में बड़ी संख्या हैं.पूरे देश में सर्वाधिक उर्दू समाचार-पत्र बिहार से ही निकलता है.जदयू में कई मुस्लिम नेता उर्दू के बड़े जानकार हैं.उर्दू अख़बार के एक संपादक की पार्टी में अच्छी पकड़ मानी जाती है.एक बोर्ड के चेयरमैन तो बाजाप्ता अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू के राज्य अध्यक्ष भी हैं.सदन के एक सदस्य उर्दू तहरीक से जुड़े हुए हैं.उर्दू की बेदारी के लिए ख़ुद का एक संगठन भी चलाते हैं.

इनमें से ही उर्दू में पत्रिका निकालने के लिए सहयोग लिया जा सकता था.इसके मायने है कि जदयू को उर्दू आबादी से बहुत ज़्यादा ताल्लुक़ नहीं रह गया है.इन नेताओं से सलाह-मशविरा करना भी पार्टी ने वाजिब नहीं समझा.क्या पार्टी मुसलमानों में अब विस्तार नहीं चाहती है.उर्दू पर अंग्रेज़ी को तरजीह देना कितना सही है?जदयू के मुस्लिम नेताओं को भी इसका मूल्यांकन करना होगा.चुनाव में हार-जीत अपनी जगह पर मगर इसका समुदाय से प्रतिशोध समझ से परे है.बिहार की सत्ता इतिहास में पहली बार मुस्लिम मुक्त सरकार भी देखने को मिला.अल्पसंख्यक मंत्रालय किसी मुस्लिम को देने की जगह इसकी कमान एक हिंदू को सौंप दी गयी.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते रहे हैं कि हम वोट की राजनीति नहीं करते,कोई वोट दे या नहीं,उनके लिए काम करते रहेंगे.

  • बगहा – भीष्म साहनी
  • पश्चिम चंपारण – शत्रुघ्न कुशवाहा
  • पूर्वी चंपारण – रतन सिंह पटेल,
  • शिवहर – कमलेश पांडे ,
  • सीतामढ़ी – सत्येंद्र कुशवाहा,
  • दरभंगा – अजय चौधरी
  • सुपौल – रजेंद्र प्रसाद यादव
  • मधुबनी – सत्येंद्र कामत
  • अररिया – आशीष कुमार पटेल
  • किशनगंज – नौशाद आलम
  • पूर्णिया – प्रसाद महतो
  • कटिहार – शमीम इकबाल
  • मधेपुरा – मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी
  • सहरसा – चंद्रदेव मुखिया
  • मुजफ्फरपुर – मनोज कुमार
  • गोपालगंज – संजय चौहान
  • सिवान – उमेश ठाकुर
  • सारण – विशाल सिंह राठौर
  • वैशाली – सुभाष चंद्र सिंह
  • समस्तीपुर – अश्वमेघ देवी
  • बेगूसराय- रुदल राय
  • खगड़िया – बबलू मंडल
  • नवगछिया – वीरेंद्र सिंह कुशवाहा
  • भागलपुर – पंचम श्रीवास्तव
  • बांका – अमरेंद्र कुमार सिंह
  • मुंगेर – संतोष साहनी
  • लखीसराय – राम रामानंद मंडल
  • शेखपुरा – रणधीर कुमार उर्फ सोनी मुखिया
  • नवादा – सलमान रागी
  • नालंदा – सिया शरण ठाकुर
  • बाढ़ – परशुराम पारस
  • पटना -अरुण मांझी
  • भोजपुर – संजय सिंह
  • बक्सर – संतोष कुमार निराला
  • कैमूर – इसरार खान
  • रोहतास – नागेंद्र चंद्रवंशी
  • अरवल – मंजू देवी
  • जहानाबाद – राहुल शर्मा
  • औरंगाबाद – विश्वनाथ सिंह
  • गया – द्वारका प्रसाद
  • जमुई – शंभू शरण

दूसरी ख़बर यह है कि सोमवार को हीव पार्टी ने बिहार के कुल 41 जिला इकाइयों के अध्यक्ष की घोषणा की.इसे लेकर आज पार्टी कार्यालय में मीटिंग भी की गई थी, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने टीम बनानी शुरू कर दी है.38 जिलों के साथ बगहा, बाढ़, नवगछिया में नये अध्यक्ष बनाये गये हैं.41 में मात्र 4 मुसलमानों को अध्यक्ष बनाया गया है.गया के ज़िलाध्यक्ष अलेक्ज़ेंडर खान को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है.नवादा में सलमान रागीब को बरकरार रखा गया है.पूर्व मंत्री नौशाद आलम को किशनगंज की कमान सौंपी गयी है.शमीम इकबाल को कटिहार का अध्यक्ष बनाया गया है.कैमूर के अध्यक्ष इसरार खान बनाये गये हैं.सवाल यह कि क्या जदयू को अब मुसलमानों पर अब भरोसा नहीं रह गया है,जो उन्हें संगठन से सरकार तक बुरी तरह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.ऐसे में तो एक बड़ा वोटबैंक को पार्टी से जोड़ने का सपना कभी साकार नहीं होगा.मुसलमानों को भी संभवतः इसी आंख मिचौली के कारण जदयू पर भरोसा नहीं बन पाता है.

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