गुलनाज़ मामला पर सरकार की सुस्ती को लेकर महिलाओं का फूटा ग़ुस्सा,कारगिल चौक पर एक दर्जन संगठनों का प्रदर्शन

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पटना(मंथन डेस्क)गुलनाज़ मामला में सरकार के सुस्त रवैया पर सोमवार को महिलाओं का ग़ुस्सा फूट पड़ा.बिहार महिला समाज,ऐपवा,एडवा,बिहार विमेंस नेटवर्क,नागरिक अधिकार मंच-बिहार,एएसडब्ल्एफ मुस्लिम महिला मंच बिहार-,मेरी पंचायत-मेरी शक्ति
एनएपीएम,मानव अधिकार रक्षा,बिहार दलित महिला अधिकार मंच-बिहार आदि एक दर्जन संगठनों ने कारगिल चौक पर जम कर प्रदर्शन किया.इस मौक़े पर वक्ताओं ने कहा कि राज्य में लगातार महिलाओं पर हिंसक हमले हो रहे हैं.महिलाओं को जिन्दा जलाया जा रहा है.सरकार और प्रशासन इस तरह के तमाम मामले पर कोई कठोर कार्रवाई करने में विफल रही है.पिछले दिनों वैशाली में एक लड़की को जिंदा जला दिया गया.भागलपुर, दरभंगा समेत राज्य में लगातार हमले जारी हैं.महिलाओं पर हो रहे बर्बर हमले और गुलनाज़ परिवार को न्याय देनें की मांग को लेकर राज्य की सभी महिला संगठनों, नागरिक संगठनों ने आज कारगिल चौक पर प्रदर्शन किया.प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बिहार महिलाओं के प्रति अपराध में सबसे ज्यादा हिंसक राज्य हो गया है.जघन्य और बर्बर अपराध हो रहे हैं.वैशाली में गुलनाज़ को जिंदा जला दिया गया, भागलपुर और दरभंगा में महिलाओं के साथ हिंसक घटना हुई.दुखद है कि इन घटनाओं पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

कारगिल चौक पर महिला संगठनों का प्रदर्शन


वक्ताओं ने कहा कि नीतीश और भाजपा की सरकार में महिलाओं पर चौतरफा हमले हो रहे हैं.बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा धोखा है.बलात्कार और ज़िंदा जलाने की घटनाओं में इजाफा हुआ है.
इतनी बड़ी घटना के बाबजूद सरकार की तरफ से किसी सरकारी प्रतिनिधि को गुलनाज़ की मां को यह भरोसा दिलाने नहीं भेजा गया कि उसे न्याय मिलेगा. जबकि पूरे राज्य में गुलनाज़ के लिए न्याय की मांग उठ रही है, और सरकार चुप है.वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा देने में मुख्यमंत्री विफल हैं.
हम मांग करते हैं कि गुलनाज़ के परिवार को न्याय मिले.इस तरह के मामलों का निपटारा फास्ट ट्रेक कोर्ट के तहत हो.भागलपुर, दरभंगा समेत तमाम मामलों के दोषी को शीघ्र गिरफ्तार किया जाय.
आज की सभा को संबोधित करने वालों में बिहार महिला समाज से निवेदिता झा, राजश्री किरण, ऐपवा से सरोज चौबे ,अनीता सिन्हा, एडवा से रामपरी, सरिता पाण्डेय, एनएपीएम से कामायनी स्वामी, बिहार विमेंस नेटवर्क से नीलू, नागरिक अधिकार मंच से फादर जोश, गालिब, सिस्टर लीमा, मुस्लिम महिला मंच से अख्तरी, बिहार दलित महिला मंच से प्रतिमा , एएसडब्लूएफ की आसमां खान, चंद्रकांता, सरफराज, प्रवीण , रूपेश, इबराना, शाइस्ता अंजुम प्रमुख रुप से शामिल थीं.

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