अख़्तरुल इमान का क्या है विवाद!क्यों हिंदुस्तान पर किया एतराज,भारत के नाम पर उर्दू में ली शपथ

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सेराज अनवर

पटना:गत विधानसभा सत्रों में सूर्या नमस्कार पर सवाल उठाने वाले इस बार असद उद्दिन ओवैसी की पार्टी से जीत कर आये अख़्तरुल इमान पांच दिवसीय विशेष सत्र के पहले ही दिन विवादों में आ गये.उन्होंने हिंदुस्तान के नाम पर शपथ लेने से इंकार कर दिया.बाद में भारत के नाम पर उर्दू में शपथ ली.अमौर से एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल ईमान ने शपथ पत्र में लिखे ‘हिन्दुस्तान’ शब्द को बोलने से इनकार किया और उसकी जगह ‘भारत’ का इस्तेमाल किया.

क्या था पूरा मामला:

दरअसल सदस्यता ग्रहण के क्रम में अख्तरुल ईमान का नाम जैसे ही सदस्यता की शपथ के लिए पुकारा गया वैसे ही उन्होंने खड़े होकर हिंदुस्तान शब्द पर आपत्ति जता दी. अख्तरुल ईमान ने उर्दू में शपथ लेने की इच्छा जाहिर की लेकिन चूंकि उर्दू में भारत की जगह हिंदुस्तान शब्द के इस्तेमाल पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए प्रोटेम स्पीकर से भारत शब्द का इस्तेमाल करने की गुजारिश की.शपथ ग्रहण के दौरान सदन में अचानक विधायक अख्तरुल ईमान की बात सुन शपथ दिला रहे प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी हैरान हो गए बाबत जीतन राम मांझी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है. ये परंपरा रही है हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल बहुत पहले से ही होता आ रहा है, लेकिन इसका अख़्तरुल इमान पर कोई असर नहीं पड़ा .वह अपनी बात पर अड़े रहे. इससे बाकी विधायक भी हैरान हो गए और अखतरुल इमान सदन में ध्यानाकर्षण बने रहे.अख्तरुल इमान ने शपथ में हिंदुस्तान की जगह भारत शब्द का इस्तेमाल किया.इनके शपथपत्र में उर्दू में हिंदुस्तान लिखा था तो उन्होंने भारत बोलने की स्पीकर से परमिशन मांग ली.

अख्तरुल इमान ने कहा कि हिंदी भाषा में भारत के संविधान की शपथ ली जाती है. मैथिली में भी हिन्दुस्तान की जगह भारत शब्द का ही इस्तेमाल किया जाता है लेकिन उर्दू में शपथ लेने के लिए जो पत्र मुहैया कराया गया है उसमें भारत की जगह हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल किया गया है. विधायक ने कहा कि वह भारत के संविधान की शपथ लेना चाहते हैं ना कि हिंदुस्तान की संविधान की.अख़्तरुल इमान पहले ही दिन सदन में धमाकेदार इंट्री से सुर्ख़ियां बटोर रहे हैं.सोशल मीडिया पर यह बहस का मुद्दा बन गया है.गौरतलब है कि जदयू के विधायक रहते विधानसभा के भीतर अख़्तरुल इमान ने सूर्या नमस्कार का कड़ा विरोध किया था.उनके विरोध के कारण ही राज्य सरकार को स्कूलों में सूर्या नमस्कार लागू करने का फैसला वापस लेना पड़ा था.

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