कांग्रेस में घमासान:ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा पार्टी छोड़ दूंगा,भाजपा से मिलीभगत का लगा आरोप

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नई दिल्ली:कांग्रेस में बदलाव को लेकर पार्टी के 23 नेताओं की चिट्ठी पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में तीखी नोंकझोंक हुई.राहुल गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद व कपिल सिब्बल आमने-सामने आ गए हैं.राहुल गांधी की ‘भाजपा के साथ सांठगांठ’ वाली टिप्पणी पर कांग्रेस में बवाल मच गया है.ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि आरोप साबित हुए तो पार्टी छोड़ दूंगा.राहुल ने चिट्ठी की टाइमिंग पर सवाल उठाए और नाराजगी जाहिर की.उन्होंने कहा कि जब सोनिया गांधी हॉस्पिटल में भर्ती थीं, उस वक्त पार्टी लीडरशिप को लेकर लेटर क्यों भेजा गया.उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह चिट्ठी भाजपा की मिलीभगत से भेजी गई.

इस पर ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि अगर राहुल गांधी की “भाजपा के साथ मिलीभगत” की टिप्पणी सही साबित हुई तो मैं इस्तीफा दे दूंगा. हालांकि आजाद ने जवाब देते समय राहुल गांधी का नाम नहीं लिया.बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भी राहुल गांधी के उस आरोप का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया था. सिब्बल ने कहा, ”मैंने राजस्थान हाईकोर्ट में कांग्रेस पार्टी का बचाव किया. मणिपुर में पार्टी का बचाव किया. पिछले 30 सालों में कभी भी किसी मुद्दे पर भाजपा के पक्ष में बयान नहीं दिया. फिर भी “हम भाजपा से मिले हुए हैं!”कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने ट्विटर पर अपने प्रोफाइल से ‘कांग्रेस’ हटा दिया है. अब उनके ट्विटर हैंडल पर किसी भी पार्टी किसी भी पद का कोई जिक्र नहीं है. कांग्रेस का कहीं दूर-दूर तक जिक्र नहीं है.

इससे पहले बैठक में सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की है.उन्होंने कहा कि मुझे रिप्लेस करने की प्रक्रिया शुरू करें.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने उनसे पद पर बने रहने को कहा.बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही है.राहुल गांधी पहले ही पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर चुके हैं.2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था.तब सोनिया ने अगस्त में एक साल के लिए अंतरिम अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली.

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