अल्पसंख्यक के अधिकार को छीन कांग्रेस ने फिर दिया मुसलमानों को धोखा:अशफाक़ रहमान

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पटना(शाद हुसैन)विधान परिषद चुनाव में अल्पसंख्यक समाज के उम्मीदवार की जगह दूसरे को टिकट दिये जाने पर जनता दल राष्ट्रवादी ने कड़ा एतराज जताया है.पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अशफाक़ रहमान ने इसे धोख़ा क़रार देते हुए कांग्रेस की नीतियों से बचने की मुसलमानों को नसीहत दे डाली है.उन्होंने कहा है कि यदि किसी कारण अल्पसंख्यक उम्मीदवार का नाम कट भी गया तो अल्पसंख्यक समाज के ही किसी शख़्स को उम्मीदवार बनाना चाहिए था.यह सरासर मुस्लिम नेताओं के साथ धोख़ा है और इस बहाने अल्पसंख्यक समाज को अपमानित करने का काम किया गया है.

यदि किसी कारण अल्पसंख्यक उम्मीदवार का नाम कट भी गया तो अल्पसंख्यक समाज के ही किसी शख़्स को उम्मीदवार बनाना चाहिए था.यह सरासर मुस्लिम नेताओं के साथ धोख़ा है और इस बहाने अल्पसंख्यक समाज को अपमानित करने का काम किया गया है.

कांग्रेस के इस रवैया से मुसलमानों को एक झटका लगा है.मुस्लिम कोटा पर दूसरे को बैठा देने से यह क़लई खुल गयी दिल से कांग्रेस ने मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा था,उसके दिल में पहले से खोट थी.जबकि मुसलमानों ने इस फैसले का समर्थन किया.यदि कांग्रेस की मुस्लिम समाज के प्रति नीयत ईमानदार होती तो तुरंत किसी मुस्लिम को उम्मीदवार बना देती.मुसलमान पता नहीं क्यों कांग्रेस के चेहरा पहचान पाने में असफल हैं.कांग्रेस ने कोई पहली बार मुसलमानों को धोखा नहीं दिया है.उसकी नीयत और चरित्र में यह समाहित है.साठ-सत्तर साल में मुसलमानों की दयनीय स्तिथि के लिए कांग्रेस ही ज़िम्मेवार है.

सीएए और एनआरसी के बाद मुसलमानों को भी समझ लेना चाहिये कि उन्हें अब राजनीति के मुख्यधारा में आना होगा.जब तक वो क़ुछ ख़ास पार्टियों के दुमछल्ला बने रहेंगे और सौतेला व्यवहार बर्दाश्त करते रहेंगे,उनके साथ इससे भी बुरा बर्ताव होता रहेगा.

मुसलमानों की आर्थिक,शैक्षणिक,सामाजिक और सियासी हालात के आकलन के लिए ख़ुद कांग्रेस ने सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्रा आयोग का गठन किया और मुसलमानों की ज़बर्दस्त बदहाली को दूर करने की सिफ़ारिश को लागू करने से इंकार कर दिया.सीएए और एनआरसी के बाद मुसलमानों को भी समझ लेना चाहिये कि उन्हें अब राजनीति के मुख्यधारा में आना होगा.जब तक वो क़ुछ ख़ास पार्टियों के दुमछल्ला बने रहेंगे और सौतेला व्यवहार बर्दाश्त करते रहेंगे,उनके साथ इससे भी बुरा बर्ताव होता रहेगा.अल्पसंख्यक समाज के साथ सदैव सौतेला व्यवहार होता रहा है.अब मुसलमानों को पीछे रह कर नहीं,बल्कि मुख्यधारा की राजनीति में आ कर अपनी लड़ाई लड़नी होगी.

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