कांग्रेस का मुस्लिम कार्ड फुस: समीर सिंह बने उम्मीदवार तो कौकब क्यों नहीं?

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सेराज अनवर

पटना:पूर्व केंद्रीय मंत्री और कई बार के सांसद तारिक़ अनवर की एक नादानी से कांग्रेस को फज़ीहत उठानी पड़ी.तारिक़ समर्थक कल रात से आज सुबह तक क़सीदा पढ़-पढ़ झूम रहे थे.दोपहर होते-होते मातम पसर गया.तारिक़ अपने पटना आवास पर नामांकन में जाने के लिए अचकन चढ़ा रहे थे कि एक अतिआवश्यक जानकारी सुन माथा पकड़ लिया.ख़बर आयी कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण उनका नामांकन रद्द हो सकता है.तुरंत बिहार कांग्रेस ने विधान परिषद चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बदल दिया .तारिक अनवर की जगह समीर सिंह को नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए विधानसभा रवाना होने को कहा गया.

तारिक़ अनवर

गिरते-पड़ते समीर विधानसभा की तरफ़ भागे.तारिक़ अनवर की एक गलती से समीर का भाग्य खुल गया.समीर राजपूत जाति से आते हैं.बिहार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं.बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल हैं.गोहिल का संबंध भी राजपूत जाति से है.कांग्रेस के मुस्लिम कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि तारिक़ अनवर का नाम वापस लेना मजबूरी बन गयी थी तो इस सीट पर किसी मुस्लिम का ही हक़ बनता था.कौकब क़ादरी भी कार्यकारी अध्यक्ष हैं.तारिक़ के बदले कौकब को उम्मीदवार बनाया जा सकता था.बारी आज़मी थे,इंतेख़ाब आलम थे.

तारिक़ अपने पटना आवास पर नामांकन में जाने के लिए अचकन चढ़ा रहे थे कि एक अतिआवश्यक जानकारी सुन माथा पकड़ लिया.ख़बर आयी कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण उनका नामांकन रद्द हो सकता है.

कौकब की उम्मीदवारी पर सभी मुस्लिम नेताओं ने सहमति भी दे रखी थी.हुआ यूं कि तारिक़ अनवर ने कटिहार की मतदाता सूची से नाम कटवा कर दिल्ली के वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा लिया.लोकसभा या राज्यसभा चुनाव के लिए देश के किसी कोने में नाम होना चाहिए.लेकिन विधानसभा और विधान परिषद चुनाव लड़ने के लिए प्रदेश के वोटर लिस्ट में नाम होना अनिवार्य है.तारिक़ इसी में फंस गये.अब हाथ मलने की सेवा कुछ नहीं है.उनकी इस नादानी से कांग्रेसी मुसलमानों में मायूसी है.झेंप मिटाने के लिए समीर सिंह की तस्वीर के साथ सोशल मीडिया पर बधाई का तांता लगा हुआ है.इससे यह भी सिद्ध हुआ कि उगते सूरज की सब पूजा करते हैं.

भोज के दिन कोढ़ा रोपने का हस्र यही होता है.25 जून यानि आज ही नामांकन का आखिरी दिन था.सभी पार्टियों ने दो दिन पूर्व ही उम्मीदवारों की घोषणा कर दी.मात्र एक सीट के लिए कांग्रेस ठसक दिखा रही थी.

पार्टी ने वक्त रहते तारिक की बजाय समीर सिंह को प्रत्याशी बना दिया.ऐसा नहीं होता तो तारिक अनवर की उम्मीदवारी रद्द हो जाती.भोज के दिन कोढ़ा रोपने का हस्र यही होता है.25 जून यानि आज ही नामांकन का आखिरी दिन था.सभी पार्टियों ने दो दिन पूर्व ही उम्मीदवारों की घोषणा कर दी.मात्र एक सीट के लिए कांग्रेस ठसक दिखा रही थी.अब तारिक अनवर दलील दे रहे हैं कि पहले मेरे नाम की कोई चर्चा नहीं थी.पार्टी आलाकमान ने मुझे उम्मीदवार बनाया.इसके बाद यह पता चला कि प्रत्याशी बनने के लिए बिहार के वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी है.मैं कई बार लोकसभा और राज्यसभा का सदस्य रहा हूं और मेरा दिल्ली के वोटर लिस्ट में नाम है.लोग बाग कह रहे हैं कि आप कैसे नेता हैं कि आपको अपनी ख़बर नहीं.एक कहावत है कि जैसी नीयत वैसी बरकत.कांग्रेस ने तारिक़ को बेबसी में उम्मीदवार बनाया था.यदि मुस्लिम कार्ड खेलती या मुस्लिम नेता पसंद होते तो मुसलमान को ही उम्मीदवार बना कर दिखा देती?

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