विधान परिषद चुनाव-2 कौकब क़ादरी के नाम पर कांग्रेसी मुस्लिम नेता एकजुट,सदानंद,मदन मोहन झा भी दौड़ में शामिल

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सेराज अनवर

पटना:बिहार विधान परिषद चुनाव का बिगुल बज चुका है.ज़रूरत पड़ने पर 6 जुलाई को मतदान होगा.विधायकों की संख्या के आधार पर 3 राजद, 3 जदयू, 2 भाजपा और 1 कांग्रेस के हिस्से में सीट जायेगी.चुनाव आयोग ने कार्यक्रम की घोषणा कर दी है.18 जून को अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन शुरू हो जायेगा.25 जून तक नामांकन होगा.26 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 29 जून तक नाम वापस लिये जाएंगे.यदि 9 सीटों के लिए 9 ही उम्मीदवारों ने पर्चा भरा तो उसी दिन जीत का सर्टिफिकेट दे दिया जायेगा.यदि आवश्यकता पड़ी तो 6 जुलाई को मतदान होगा.मगर मौजूदा माहौल को देखते हुए नहीं लगता की मतदान की बारी आयेगी.चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस में संभावित दावेदारों की सरगर्मी बढ़ गयी है.पार्टी के अंदर सभी राजनीतिक बेरोज़गार नेता एक अदद सीट के उम्मीदवार हैं.कोई मुस्लिम के नाम पर,तो कोई यादव,ब्राह्मण,भूमिहार,राजपूत ,पिछड़ा-अतिपिछड़ा के नाम पर.कांग्रेस में समीकरण बड़ी तेज़ी बदल रहा है.

सदानंद सिंह

अब सूचना मिल रही है कि सदानंद सिंह और मदन मोहन झा एमएलसी के दौड़ में शामिल हो गये हैं.कौकब क़ादरी मुस्लिम कार्ड के रुप में मज़बूत दावेदार हैं.इनके नाम पर पार्टी के मुस्लिम नेताओं में सहमति है.वैसे अनिल शर्मा,समीर सिंह,चंदन बागची,राज कुमार राजन,ललन यादव,चंदन यादव भी विधान परिषद पहुंचने के लिए पर तौल रहे हैं.इस परस्तिथि में आलाकमान के किसी एक के नाम पर मुहर लगाना मुश्किल काम है.मदन मोहन झा बिहार प्रदेश कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष हैं.शिक्षक कोटे से चुनाव लड़ विधान परिषद पहुंचते रहे हैं.इस बार भी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे कि कोरोना के कारण चुनाव स्थगित हो गया.अभी शिक्षक कोटे के विधान परिषद चुनाव की तारीख़ की घोषणा नहीं हुई है और फिर वहां पक्की जीत निश्चित नहीं है,सो उन्होंने इरादा बदल लिया है. विधायक कोटा से उम्मीदवारी विधान परिषद पहुंचने के लिए आसान माध्यम है.इस लिए मदन मोहन झा उम्मीदवारी के दौड़ में शामिल हो गये हैं.सदानंद सिंह बिहार विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं.इन्होंने चुनावी सियासत से संयास लेने का एलान कर रखा है.अपने विधानसभा क्षेत्र कहलगांव से अब अपने सुपुत्र को उतराधिकारी बनाना चाहते हैं और ख़ुद विधान परिषद में पहुंच भाग-दौड़ की राजनीति से आराम करने की इच्छा है.हालांक़ी,सदानंद बाबू कौकब क़ादरी के पैरवीकार माने जाते हैं.

मदन मोहन झा

कौक़ब क़ादरी बिहार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं.इनकी दावेदारी सबसे तगड़ी है.इसकी वजह यह है कि कौकब के समर्थन में कुछ मुस्लिम दावेदारों ने अपना नाम पीछे कर लिया है.आज़मी बारी,इंतेख़ाब आलम आदि भी उम्मीदवारी के दौड़ में शुमार माने जा रहे थें.मगर कौकब के नाम पर इन सभी की सहमति बन गयी है.कौकब मुस्लिम समाज से इकलौते दावेदार हैं.तर्क है कि बारी-बारी इस बार मुसलमान की बारी.राज्यसभा भेजने की बारी आयी तो भूमिहार जाति से अखिलेश सिंह को सदस्यता मिली.फिर विधान परिषद चुनाव में ब्राह्मण से प्रेमचंद मिश्रा को प्रतिनिधित्व दिया गया.इस बार मुस्लिम समाज का कहना है कि उनकी बारी है.दलील यह भी दी जा रही है कि कांग्रेस का आधार वोट सिर्फ़ मुसलमान का है.तो उनकी नुमाईंदगी क्यों नहीं?वैसे सदानंद सिंह,कौकब क़ादरी,मदन मोहन झा,राज कुमार राजन के बीच उम्मीदवारी के लिए कड़ा मुक़ाबला है.

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