वाहवाही लूट ले गयी नीतीश सरकार राशनकार्ड में शर्तों का अंबार,मेहनत गयी बेकार

0
81

सीमांचल ( अशोक कुमार ) लॉकडाउन के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब घोषणा की थी कि प्रत्येक जिले में पेंडिंग राशनकार्ड तुरंत बनेंगें तथा राशनकार्ड विहीन लोगों को भी राशनकार्ड धारियों की तर्ज़ पर हजार-हजार रुपये के अलावा मुफ्त अनाज मिलेंगे तो राशनकार्ड से वंचित जनता के चेहरों पर भी राहत भरी मुस्कान बिखेरती नजर आने लगी थी कि मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन की भीषण त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण तो दिखाया। लोगों में राशनकार्ड बनवाने की होड़ मचती दिखाई देने लगी। जनता ने इस बाबत अपने वार्ड कमिश्नरों का दरवाज़ा खटखटाना शुरू किया , क्योंकि मुख्यमंत्री की घोषणा को अखबारों की सुर्खियां बनाने वाली खबरों में लगातार सुझाये जाते रहे थे कि संबंधित वार्ड कमिश्नरों की अनुशंसा पर ही राशनकार्ड से वंचितों को हजार रूपये के साथ सूखे खाद्यान्न सामग्री दिये जायेंगे और उसी वार्ड कमिश्नर की अनुशंसा पर राशनकार्ड बना कर भी दिये जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन की भीषण त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण तो दिखाया। लोगों में राशनकार्ड बनवाने की होड़ मचती दिखाई देने लगी। जनता ने इस बाबत अपने वार्ड कमिश्नरों का दरवाज़ा खटखटाना शुरू किया , क्योंकि मुख्यमंत्री की घोषणा को अखबारों की सुर्खियां बनाने वाली खबरों में लगातार सुझाये जाते रहे थे कि संबंधित वार्ड कमिश्नरों की अनुशंसा पर ही राशनकार्ड से वंचितों को हजार रूपये के साथ सूखे खाद्यान्न सामग्री दिये जायेंगे और उसी वार्ड कमिश्नर की अनुशंसा पर राशनकार्ड बना कर भी दिये जायेंगे।

जाहिर सी बात है की मुख्यमंत्री की उक्त घोषणा के प्रकाश में आने के साथ ही जनता ने अपने-अपने वार्ड कमिश्नरों का माथा नोचना शुरू कर दिया और अभी अभी जब नये शर्तों की सरकारी चिट्ठी लेकर बीएलओ ने सरकारी निर्देशों के अनुसार राशनकार्ड की प्रक्रिया शुरू की तो एक ओर जनता को झटका लगा तो दूसरी ओर वार्ड कमिश्नरों को भी झटके महसूस हुए कि अब उक्त सरकारी दिशा-निर्देश के अनुसार कितने प्रतिशत जनता को वे राशनकार्ड दिला सकते हैं।जी हाँ , राशनकार्ड के लिये निर्गत सरकारी परफॉर्मा में जो जनता के भाड़े के आशियाने भी ईंट कंक्रीट के बने हैं और जिनके पास किसी भी प्रकार के दो पहिया वाहन हैं या जिनकी आमदनी 20 हजार से ऊपर हैं , उनके राशनकार्ड नहीं बनेंगे।इस बात की जांच रिपोर्ट बीएलओ को करनी है।अर्थात , सीधा मतलब कि ” मुंह मे राम – बगल में छूरी ” वाली कहाबत को चरितार्थ करते हुए बिहार सरकार ने एक तीर से दो शिकार करने की सोची समझी नीतियां अपनायी हैं।पहले घोषणा कर के वाहवाही लूट ली और उसके बाद इस प्रक्रिया में वार्ड पार्षद का नाम घसीट कर वार्ड पार्षद को जनता के निशाने पर ला खड़ा किया। सरकार की राशनकार्ड प्रक्रिया में अपनायी जा रही दोरंगी नीतियों की भनक लगते ही फिलवक़्त पूर्णिया की शहरी जनता में आक्रोश पनपता दिखाई दे रहा है।लोगबाग कभी वार्ड कमिश्नर को घेरने की तैयारी में लगते दिखाई दे रहे हैं तो कोई बीएलओ की घेराबंदी के मूड में दिखाई दे रहे हैं।जनता इस क्रम में सरकार की कथनी और करनी के फर्क को भी कोसने में लग गई है और इन सभी बातों का बदला चुनाव में निकालने का मन बना रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here